
आप सभी को नमस्कार,
“माई गौमाता” (https://mygaumata.com/) उपक्रम, विश्व प्रसिद्ध “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान द्वारा संचालित है (“स्वयं बनें गोपाल” समूह के बारे में विस्तार से जानने के लिए कृपया इसकी वेबसाइट देखें- https://svyambanegopal.com/) ! “माई गौमाता” उपक्रम मुख्यतः सनातनी आदर्शों द्वारा, यानी आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा सस्ती, जमीन के लिए सबसे ज्यादा उपजाऊ और शरीर व समाज के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद विधियों द्वारा पर्यावरणीय क्रांति को जगाने के लिए कार्यरत है !
वास्तव में, पर्यावरण सरंक्षण जैसी सबसे कठिन समस्या का पूर्ण निस्तारण तभी सम्भव है, जब पर्यावरण के सबसे अहम भाग यानी खेती में केमिकल्स (रासायनिक खाद व कीटनाशक) का अंधाधुंध उपयोग रोका जा सके, साथ ही प्राकृतिक तरीकों से फल/फूल/फसल की पैदावार खूब बढ़ाई जा सके ! और इन सभी लक्ष्यों को सबसे आसानी से उपलब्ध कराने में सक्षम हैं “भारतीय देशी गाय माँ का गोबर व गोमूत्र” !
चूंकि पूरी दुनिया में भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ से बढ़कर, पर्यावरण को लाभ पहुंचाने वाला कोई दूसरा नहीं है, इसलिए इस उपक्रम का नाम परम आदरणीय गाय माँ के ही नाम पर “माई गौमाता” (My Gau Mata) रखा गया हैं ! यह उपक्रम वर्षों से, गाय माँ को ही आधार बनाकर, दुनिया की सबसे विकट आपदा यानी पर्यावरणीय समस्या को कई स्वर्णिम अवसरों में बदलकर, आम जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें ख़ुशी – ख़ुशी इंटरेस्टेड होकर सहयोग कर सकें !अगर आसान भाषा में कहें तो पर्यावरण से संबंधित संकटों को, कैसे खूब पैसा कमाने वाले रोजगारों में बदला जा सकता है, उन्ही सरल तरीकों के बारें में बताता रहा है “माई गौमाता” उपक्रम ! हमारे इस उपक्रम से, ऐसे बेहतरीन रिसर्चर्स (शोधकर्ता) जुड़े हुए हैं, जिनकी मदद से आप भी विभिन्न प्राकृतिक समस्याओं को, आर्थिक जरिया में बदलकर, आश्चर्यजनक प्रॉफिट प्राप्त कर सकतें है !
यानी हमारे रिसर्चर्स से प्राप्त जानकारी से, आप शानदार कमाई कर सकतें है, अपनी बेहद छोटी या बड़ी, खाली – बेकार पड़ी हुई बंजर जमीन को निन्मलिखित तरीकों से बदलकर-
- बेहद उपजाऊ खेत/बगीचे में बदलकर
- जंगल/फ़ूड पार्क/गार्डन युक्त पार्टी/फंक्शन/सेलिब्रेशन डेस्टिनेशन आदि में बदलकर
- भूमिगत पानी की कमी या खारापन को बदलकर
- कार्बन क्रेडिट में बदलकर

रासायनिक खादों व कीटनाशकों के वर्षों तक इस्तेमाल करने की वजह से या खारे पानी की वजह से या किसी भी अन्य कारण की वजह से कोई भी खेत/बगीचा/जमीन, चाहे कितना भी ज्यादा बंजर हो चुका हो, तब भी उसे कुछ ही माह में निश्चित उपजाऊ बनाया जा सकता है, कुछ विशेष प्राकृतिक उपायों को आजमाकर (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को बेहतरीन प्राकृतिक तरीकों से जल्दी उपजाऊ बनाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

वास्तव में ये ट्रेंड हर शहर में देखने को मिल रहा है कि लोग अपने जीवन के यादगार पलों (जैसे- शादी, जन्मदिन, उत्सव, रेस्टोरेंट में सामूहिक भोजन, किटी पार्टी, छुटियाँ मनाना आदि) के लिए ऐसी जगह जाना पसंद करतें हैं जहाँ बहुत बढियाँ प्राकृतिक नजारा – हरियाली हो, इसलिए आजकल ऐसे छोटे – बड़े थीम फ़ूड पार्क/जंगल आदि की हाई डिमांड हो गयी है जहाँ काफी पेड़ – पौधे हों ! इसके अलावा आजकल कई स्कूल के स्टूडेंट्स को भी अपने बायोडायवर्सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए जंगल या इको-कैंप की ट्रिप लगानी पड़ती है ! बेहद छोटी और बंजर जमीन पर भी हमारे रिसर्चर्स की मदद से ऐसे सस्टेनेबल जंगल बनाये जा सकतें हैं जिन्हे कभी भी खाद या पानी देने की जरूर नहीं पड़ सकती है (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को जंगल/फ़ूड पार्क की तरह विकसित करना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

अगर जमीन में भूमिगत जल बहुत कम हो चुका हो या पानी खारा हो चुका हो तब भी खेती करना बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है ! तो ऐसे मौके पर काम आते हैं कुछ बेहद सरल प्राकृतिक उपाय जिनसे धीरे – धीरे भूमिगत जल की कमी और खारापन दोनों दूर होने लगते हैं (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में कम होते भूजल या खारे पानी की समस्या को दूर करके खेती से प्रॉफिट कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

इसके अलावा कार्बन क्रेडिट से भी पैसा कमाया जा सकता है जिसमें कई कम्पनीज आपकी जमीन में लगे हर एक पेड़ के रखरखाव के बदले में आपको सालाना भत्ते दे सकतीं हैं ! मतलब जमीन और पेड़ के मालिक हमेशा आप ही रहेंगे, लेकिन उस पेड़ की ठीक से देखभाल करने के लिए, प्रदूषण फैलाने वाली कम्पनीज आपको सालाना पैसा दें सकतीं हैं, एक लिखित कॉन्ट्रैक्ट साइन हो जाने के बाद (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में पेड़ों को उगाकर कार्बन क्रेडिट से पैसा कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !
कृपया ध्यान दें हमारे शोधकर्ता कभी भी यह सलाह नहीं देते हैं कि किस जमीन/खेत/बगीचे में, किस मौसम में, किस फसल – पेड़ – पौधों – बीजों को लगाना चाहिए क्योकि पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, अलग – अलग मौसम अनुसार, विभिन्न प्रकार के फसलों/पौधों की उगने की खासियत होती है इसलिए किस क्षेत्र के, किस मौसम में, किस फसल/पौधा को उगाना ज्यादा लाभदायक होगा, उसकी एकदम सटीक जानकारी सिर्फ उस क्षेत्र में रहने वाले किसान या कृषि विभाग दे सकता है !
हमारे शोधकर्ताओं के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ाना, क्योकि अगर जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बहुत कम हो जाए तो अच्छे से अच्छा बीज/पौधा बोने पर भी या महँगी से महँगी रासायनिक खाद/कीटनाशक डालने पर भी फसल/पौधे मरने लगते हैं ……… वहीँ अगर जमीन की उपजाऊ क्षमता बहुत अच्छी हो जाए तो ……… ऐसी आश्चर्यजनक घटनाएं भी देखी गयी है कि बिना कोई नया बीज/पौधा बोये हुए भी, जमीन के अंदर से अपने आप सैकड़ों नेटिव (देशी) किस्म के पेड़/पौधे उगकर एक घना प्राकृतिक जंगल बना देतें हैं (अधिक जानकारी के लिए कृपया ये 2 यूट्यूब वीडियो देखिये- एक पागलपन भरा कदम और पूरा जंगल बदल गया और We grew a forest WITHOUT planting a single tree) !
क्योकि जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ने से, जमीन की गहराई में वर्षों पहले दबी हुई (यानी सूखकर मर गयी) जड़ों/बीजों को भी फिर से नवजीवन मिलने लगता है, जिससे वे फिर से अपने आप उगकर हरे – भरे पेड़ – पौधों का रूप ले लेते हैं ……. और अंततः अलग से बिना कोई मेहनत या पैसा खर्च किये हुए, अपने आप वहां एक घना प्राकृतिक जंगल बन जाता हैं जिससे पर्यावरण और जीव जगत (बायोडायवर्सिटी) का बहुत ही भला होता है ………. इसलिए सभी सरकारी/प्राइवेट – खाली/बेकार/बंजर – छोटी/बड़ी जमीनों की भी सिर्फ उपजाऊ क्षमता बढ़ाकर वहां अपने आप एक बढियाँ जंगल का निर्माण किया जा सकता है !
जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का एक बहुत तेज तरीका है नेटिव एनिमल्स हस्बैंड्री (यानी देशी पशुओं का पालन) क्योकि पशुओं के बेशकीमती गोबर – मल – मूत्र से बनी खाद से और पशुओं के लोकोमोशन (घूमने – फिरने) से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर जबरदस्त अच्छा असर पड़ता है (जैसे इस वीडियो में देखिये बाईसन नाम का जीव, अमेरिका का देशी प्राणी है इसलिए इसको पालने से अमेरिका के पर्यावरण पर काफी अच्छा असर पड़ता है- How bison restore the American Prairie) ! इसी तरह भारतीय देशी गाय माँ, भारतीय पर्यावरण व खेती के सुधार के लिए रामबाण से कम नहीं है !
यहाँ, अनंत वर्ष पुराने सनातन धर्म की इस प्राचीन मान्यता पर भी गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की जरूरत है कि ……… भारतीय देशी गाय माँ सिर्फ भारत देश के लिए ही बल्कि पूरे विश्व के लिए नेटिव (देशी) प्राणी है, क्योकि धरती माँ कोई और नहीं बल्कि गाय माँ ही हैं (इसलिए ग्रंथों में गाय माँ को ही जगत माता कहा गया है और खुद श्रीमद् भागवत महापुराण में भी लिखा है कि धरती माँ जब नारायण से बात कर रही थी तो उनका रूप गाय का ही था) !
वास्तव में, पुराणों के अनुसार, एक निराकार (मतलब जिसका कोई आकार नहीं है) ईश्वर अलग – अलग विशिष्ट कामों को करने के लिए अलग – अलग रूप धारण करते रहतें हैं (जैसे संहार के लिए शिव जी का रूप, पालन करने के लिए विष्णु जी का रूप, और पैदा करने के लिए ब्रह्मा जी का रूप) उसी तरह ईश्वर ने जगत को धारण करने के लिए विशाल धरती यानी पृथ्वी का रूप लिया ! लेकिन धरती माँ अपने सभी पुत्रों के लिए हमेशा उपजाऊ बनी रहें इसलिए वो खुद को सूक्ष्म रूप (यानी गाय के रूप में) में परिवर्तित करके, हम मानवों के बीच में विचरने लगी, इसलिए कई परम आदरणीय संत महात्मा, भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ को भगवान कृष्ण का ही साक्षात् ममतामयी अवतार मानते हैं (अतः यह महामूर्खता ही है कि मानवों ने गाय माँ से प्राप्त बेशकीमती गोबर व गोमूत्र से अन्न की पैदावार बढ़ाने की जगह, गाय माँ को ही मारकर खाना शुरू कर दिया) ! ग्रंथों के अनुसार, पूरी पृथ्वी पर कोई ऐसी जगह नहीं हैं जहाँ भारतीय गाय माँ का अंश मौजूद ना हो !
इसलिए सारांश रूप में कई पर्यावरण शोधकर्ताओं का मानना है कि ………… दूसरे देशों के नेटिव प्राणियों (जैसे- अमेरिकन बाईसन, यूरोपियन खरगोश, अफ्रीकन हाथी, ऑस्ट्रेलियन कंगारू आदि) के मल – मूत्र में उतनी क्षमता नहीं है कि वो अपने देश/द्वीप के अलावा, किसी दूसरे देश/द्वीप की बंजर जमीनों की उपजाऊ क्षमता को ज्यादा बेहतर कर सकें ……….. लेकिन भारतीय देशी गाय माँ के गोबर – गोमूत्र में इतनी जबरदस्त पॉवर होती है की वो ना केवल भारत बल्कि सभी देशों में मौजूद बंजर जमीनों को भी बेहद उपजाऊ बना सकतें है, इसलिए अब कई दूसरे देश भी अपनी मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए, भारतीय गोबर को बड़ी मात्रा में नियमित रूप खरीदते जा रहें हैं (अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्नलिखित मीडिया न्यूज़ पढ़ें-
दुनिया में बढ़ी गोबर की इतनी डिमांड ! भारत से लगातार खरीद रहे है ये देश, वजह जानकर हो जाएंगे हौरान ……….. India Cow Dung : kuwait भारत से बोला हमें चाहिए गोबर , Please भेजिए ……….. गाय के गोबर में ऐसा क्या जो खरीदने के लिए लाइन लगाए हैं अरब देश ……….. विदेशों में भारत के गोबर की भारी मांग, नाम दिया ब्राउन गोल्ड, कीमत 40 से 50 रुपये किलो ……….. अमेरिकी बाजार में भारतीय गायों के गोबर की धूम, हॉट केक की तरह है मांग ……….. ऑनलाइन 100 रु किलो बिक रहा है गाय का गोबर,आप भी कर सकते है यह बिज़नेस
अतः सभी बुध्दिमान किसानो/प्रकृति प्रेमियों/पर्यावरणीय सरकारी विभागों को सबसे पहले और सबसे ज्यादा ध्यान जमीन की उपजाऊ क्षमता सुधारने पर देना चाहिए ! इसे इस आसान उदाहरण से भी समझा जा सकता है की जमीन/खेत, माँ की तरह होतीं है और पेड़/पौधे/फसल उसके ऐसे दुधमुहें बच्चे की तरह होतें हैं जो अपनी धरती माँ से ही पोषण पाकर जिन्दा रहते हैं, इसलिए अगर धरती माँ की देखभाल करना छोड़कर सिर्फ बच्चे (यानी पेड़/पौधे/फसल) की देखभाल की जाए, तो ये निश्चित है कि बच्चे देर – सवेर मर जाएंगे, जबकि वहीँ अगर धरती माँ की देखभाल की जाए तो बच्चे अपने आप इतने ज्यादा स्वस्थ – मजबूत हो जाएंगे कि उन्हें ना ही कभी किसी कीटनाशक की जरूरत पड़ेगी और ना ही किसी उर्वरक की (जैसे जंगल में किसी भी पेड़ – पौधे को कभी उर्वरक या कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती है) !
आईये अब सबसे पहले आपको बंजर जमीन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के बारें में संक्षेंप में बतातें हैं-
वास्तव में जब भी, कोई दूरदर्शी व्यक्ति खेती/बागवानी के बारें में बात करतें है तो सबसे पहला प्रश्न यही आता है कि कैसे हर तरह के खेतो/बगीचों की मिट्टी को इतना ज्यादा उपजाऊ बनाया जा सके कि हर तरह के पौधों/फूलों/फलों/फसलों की पैदावार खूब हो सके, वो भी बिना किसी केमिकल युक्त फ़र्टिलाइज़र व पेस्टिसाइड (रासायनिक खाद व कीटनाशक) का इस्तेमाल किये हुए !
सामान्यतया बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए ये 2 महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं सम्पन्न करनी होती हैं- (1) जहरीले फ़र्टिलाइज़र व पेस्टिसाइड के लगातार इस्तेमाल करने से खेतों/बगीचों की जमीनों के अंदर मर चुके गुड बैक्टीरिया (अच्छे जीवाणु) को फिर से तेजी से पैदा करना होता है, ताकि जमीन की उर्वरक क्षमता व सभी तरह के पौधों की इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी हो सके (अगर जमीन स्वस्थ हो तो जमीन से आने वाले अधिकाँश हानिकारक कीटाणु अपने आप समाप्त हो जाते हैं) …… (2)- जमीन को आवश्यक कई बेशकीमती पोषक तत्व भी प्रदान करने होतें हैं ताकि सभी तरह के पौधे/फल/फूल/फसल की खूब पैदावार हो सके !
अतः आपको खेतो/बगीचों से लगातार बढ़िया फसल नहीं मिल सकती है, अगर आपके पास निम्नलिखित 4 चीजें नहीं हैं तो-
(1) फसलों के लिए खाना बनाने में माहिर, अच्छे जीवाणु !
(2) फसलों के लिए खाना बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां (जिसे ह्यूमस कहतें हैं) !
(3) जीवाणुओं को सुरक्षित रूप से रह सकने लायक खेत या बगीचा (हानिकारक केमिकल्स रहित) !
(4) अच्छे जीवाणुओं के परम् मित्र यानी विविध जीव {जैसे- चिड़िया (जो हवा से आने वाले कई हानिकारक कीड़ों को खाकर फसलों की मुफ्त में रक्षा तो करती हैं), केचुआ, तितलियाँ, भौरें और विभिन्न तरह के पेड़ आदि (लोग पेड़ों की असली महिमा समझते नहीं हैं लेकिन वास्तविकता यही है कि पेड़ों के बिना खेत परमानेंट उपजाऊ नहीं रह सकतें है क्योकि बायोडायवर्सिटी यानी जैव विविधता बिना पेड़ों के सम्भव नहीं हैं) !
अतः ये सत्य है कि अगर सबसे कम खर्च में, सबसे ज्यादा फसल, सबसे ज्यादा वर्षों तक चाहिए तो ऊपर लिखी हुई 4 चीजें आपके पास होनी ही चाहिए ……… और ये 4 चीजें कैसे आप अपने छोटे ये बड़े बगीचे/खेत/जमीन में पा सकते हैं ……… जानने के लिए कृपया हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क करिये, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !
आईये अब बात करते हैं , भूमिगत पानी की कमी व खारापन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के बारें में-
ये तो अब लगभग सभी को पता चल गया है कि ना केवल विश्व के बल्कि भारत के भी कई दर्जन महानगरों में जमीन के नीचे का पानी एकदम सूख चुका है (ZERO Level of Ground Water) इसलिए इन शहरों के अधिकाँश लोग पूरी तरह से म्युनिसिपैलिटी (महानगर पालिका) की वाटर सप्लाई के भरोसे जीवित हैं और अगर एक दिन भी पानी की सप्लाई बंद हो जाए तो जनता में चीख – पुकार मच जाती है इसलिए म्युनिसिपैलिटी से मिलने वाले पानी में भले ही कभी गलती से कोई गंदगी मिल जाए तब भी जनता मजबूर है उसी पानी को इस्तेमाल करने के लिए !
जिन्दा रहने के लिए सबसे आवश्यक चीजों में हवा के बाद दूसरा नंबर पानी का ही आता है और यह गजब की अज्ञानता हम मानवों में देखने को मिल रही है कि हर शहर में तेजी से गिरते हुए पानी के लेवल की बार – बार चेतावनी के बावजूद भी हम लोग कुछ भी नहीं कर रहें हैं इसे रोकने के लिए ! अतः संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव से लेकर विश्व के कई बुद्धिजीवियों द्वारा की गयी यह भविष्यवाणी कि “अगला विश्व युद्ध पानी के लिए हो सकता है”, गलत नहीं लगती है !
आपको जानकार शायद आश्चर्य हो लेकिन जिन महानगरों में पानी का लेवल एकदम सूख चुका है उन महानगरों से कई लोग अपना जमा जमाया बिजनेस, नौकरी, घर, प्रॉपर्टी आदि छोड़कर दूसरे शहर जाने को मजबूर हो रहें हैं ! और जिन शहरों में पानी पूरी तरह से सूखा नहीं है लेकिन बहुत कम बचा है उनके बारे में सुनने को मिल रहा है कि वहां का पानी इतना दूषित हो चुका है कि उसे पीने से कई तरह की बीमारियां हो सकतीं हैं !
आज जिसे देखो वही अपना घर – बंगला – ऑफिस आदि सजाने में लगा हुआ है लेकिन बहुत ही कम लोग यह दूरदर्शी सोच इस्तेमाल कर पा रहें है कि आखिर क्या फायदा ऐसी सजावट का जिसे हो सकता है कि मात्र 5 से 10 साल बाद ही छोड़कर जाना पड़े क्योकि “बिन पानी सब सून” ! निकट भविष्य में, दुनिया में पानी की कमी की असली भयानक तस्वीर दिखाने की वजह से ही कुछ विदेशी मूवीज (जैसे- “द साइलेंट सी”; The Silent Sea) बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हुई है !
इसलिए हम लोग अपनी हर निजी समस्याओं को भी सरकार के मत्थे मढ़कर, शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में छिपाकर आने वाले भयानक खतरे के प्रति निश्चिन्त होकर बिल्कुल नहीं बैठ सकतें हैं ! इसमें कोई शक नहीं की भारतवर्ष के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ईमानदारी पूर्वक यथासम्भव देश हित के प्रयास में दिन रात लगे हुए हैं, लेकिन जब बार – बार समझाने के बावजदू भी करोड़ो जनता पानी की बर्बादी रोज कर रही हो तो कोई भी प्रशासन पानी की कमी को दूर करने में कितना सफल हो पायेगा !
इसलिए इससे पहले कि आपको भी पानी की कमी की वजह से अपना बना – बनाया सपनो का आशियाना यानी घर – नौकरी – बिजनेस – प्रॉपर्टी छोड़कर कही दूसरी जगह शिफ्ट होने के लिए मजबूर होना पड़े, आप निश्चित तौर पर प्रयास कर सकतें हैं निकट भविष्य में आने वाले इस दर्दनाक खतरे से निपटने के लिए ! जिसके लिए आप अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित 3 कामों में से कोई भी काम कर सकतें हैं-
(1) अपने घर की छत से जोड़कर “बोरवेल सहित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम”” या “बोरवेल रहित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” को फिट करवाना !
(2) घनी आबादी वाले क्षेत्रों यानी कॉलोनी/मोहल्लो के अंदर स्थित अपनी खुद की जमीनों में (या सरकार की बेकार – गंदी अवस्था में पड़ी हुई जमीनों में, सरकार की इच्छा व अनुमति से) छोटे – छोटे जलाशयों (यानी तालाब, Ponds) का निर्माण करवाना !
(3) कम आबादी वाले क्षेत्रों यानी कस्बों/गावों के अंदर स्थित अपनी खुद की जमीनों/खेतों में (या ग्राम समाज/पंचायत/सरकार की बेकार – बंजर अवस्था में पड़ी हुई जमीनों में, सरकार की इच्छा व अनुमति से) बड़े – बड़े जलाशयों का निर्माण करवाना !
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रक्रिया को समझने की आसानी के लिए कह सकतें हैं, “धरती के अंदर स्थित जल को रिचार्ज (recharge) करना”, जैसे- मोबाइल को लगातार इस्तेमाल करने से जब उसकी बैटरी की बिजली कम हो जाती है तब उसे बाहर से बिजली देकर रोज रिचार्ज करना होता है, उसी तरह धरती के पानी को लगातार इस्तेमाल करते रहने से, पानी में आयी कमी को दूर करने के लिए, बाहर से पानी यानी बारिश के पानी को धरती के अंदर भेजकर, पानी की रिचार्ज करना जरूरी होता है !
वास्तव में बारिश का जो पानी हर साल बरसता है उसका अधिकांश हिस्सा जमीन के अंदर नहीं जा पाता है क्योकि बढ़ते शहरीकरण की वजह से अधिकांश जमीनों पर सीमेंट से बने हुए मकान व सड़कें बन गयी हैं (जो पानी को जमीन के अंदर जाने से रोकतें हैं) इसलिए बारिश का अधिकांश पानी, सड़क किनारे बनी हुई नालियों से बहते हुए बड़े नालों में पहुँच जाता है (और उसमे से कुछ हिस्सा सूरज की गर्मी से भांप बनकर भी उड़ जाता है), फिर बड़े नालों से अंततः नदी में पहुँच जाता है ! इस तरह शहर की बड़ी आबादी के नीचे की जमीन तक बारिश का बेशकीमती पानी बहुत मामूली मात्रा में ही पहुँच पाता है जिसकी वजह से आजकल यही विडंबना हर शहर में देखने को मिल रही है कि जमीन के अंदर पानी लगातार सूखते रहने की वजह से पानी का लेवल तेजी से नीचे गिरते जा रहा है इसलिए हर कुछ साल बाद बोरवेल को और ज्यादा गहरा खुदवाना पड़ता है !
इसलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” (Rainwater Harvesting with Borewell Recharge; वर्षा जल संचयन) वो प्रक्रिया होती है, जिसमें हर साल बारिश के मौसम में जो लाखो लीटर पानी घर की छत पर मुफ्त में बरसता है उसे भूमिगत जल तक (यानी 50 फ़ीट से लेकर 200 फ़ीट गहराई तक) तुंरत पंहुचा दिया जाता है जिससे भूमिगत जल का स्तर इतना अधिक बढ़ जाता है कि पूरे साल भर पानी का लेवल कम नहीं होने पाता है !
आज भले ही हमे पीने का पानी आसानी से मिल जा रहा हो लेकिन यह तय है कि जमीन के अंदर का पानी अगर इसी तेज रफ्तार से सूखता रहा तो बिना जलाशय की मदद के हम कुछ सालों बाद पानी नहीं पा सकेंगे ! जैसे आग लगने पर कुंआ तुरंत नहीं खोदा जा सकता है, बल्कि पहले से खोद कर रखना पड़ता है, ठीक इसी तरह निकट भविष्य में हर कॉलोनी/मोहल्ले में पानी के लिए मचने वाली जनता की चीख – पुकार को रोकने के लिए बहुत जरूरी है कि हर घर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (बोरवेल सहित या रहित) का इंस्टालेशन करवाया जाए और हर कॉलोनी/मोहल्ले/कस्बे/गाँव में थोड़ी – थोड़ी दूरी पर छोटे – बड़े जलाशयों का निर्माण करवाया जाए !
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ ऐसे सज्जनो से भी जल बचाने की अपार महिमा के बारे में जाना, जिन सज्जनों ने अपने बिजनेस में अक्सर होने वाले बड़े आर्थिक घाटों व अपने शरीर की कुछ जिद्दी बिमारियों का कारण जानने के लिए “पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी” (पूर्व जन्म चिकित्सा) की तो उन्हें पता चला की पूर्व के किसी जन्म में उन्होंने अपने ऐशो – आराम – सुख – सुविधा के लिए पानी की बहुत फिजूल खर्ची की था इस वजह से उन्हें उस पाप का दंड, इस जन्म में आर्थिक नुकसान व शरीर की बिमारी के रूप में मिल रहा है (यह घटना यह भी साबित करती है कि अगर जल का नुकसान करने से भगवान नाराज होकर दंड दे सकतें हैं तो जल को बचाने से भगवान की परम दुर्लभ प्रसन्नता भी प्राप्त की जा सकती है) !
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जल, चन्द्रमा का कारक होता है और चन्द्रमा, मन का कारक होता है इसलिए ज्योतिष के अनुसार पानी की बर्बादी करने से मानसिक अशांति बढ़ती है और मानसिक अशांति कितना बुरा असर डाल सकती है शरीरिक स्वास्थ्य पर, यह समझाने की जरूरत नहीं है क्योकि सभी डॉक्टर्स कहतें हैं “स्ट्रेस इस द रीज़न ऑफ ऑल डिसीसिस” (मतलब मानसिक अशांति ही सभी बीमारियों की जड़ है) ! लगभग सभी धर्म ग्रंथों में लिखा है कि जलाशय का निर्माण करवाना अपने पूरे परिवार के साथ – साथ सभी पितरों/पूर्वजों को भी अक्षय पुण्य व सौभाग्य देने वाला होता है क्यकि “जल ही जीवन है” !
अगर आपको अब भी “रेन वाटर हार्वेस्टिंग” या “जलाशय” के निर्माण का तरीका समझने में कोई दिक्कत महसूस हो रही हो तो, आप हमारे रिसर्चर्स की मदद से घर बैठे ही आसान उपाय जान सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !