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About Us

 

 

आप सभी को नमस्कार,

“माई गौमाता डॉट कॉम” (www.mygaumata.com) उपक्रम, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान द्वारा संचालित है (“स्वयं बनें गोपाल” संस्थान, एक स्वयं सेवक समूह है जो अपने विभिन्न उत्कृष्ट सहायतापूर्ण कार्यों की वजह से “संयुक्त राष्ट्र संघ” के कई विश्वस्तरीय पर्यावरणीय कार्यक्रमों से भी जुड़ चुका है जिनके बारे में विस्तार से जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- www.svyambanegopal.com) !

“माई गौमाता डॉट कॉम” मुख्यतः सनातनी आदर्शों द्वारा विश्व में सर्वोन्मुखी विकास की वैचारिक क्रांति को जगाने के लिए कार्यरत है ! हमारे इस उपक्रम से, ऐसे बेहतरीन रिसर्चर्स (शोधकर्ता) जुड़े हुए हैं, जिनकी मदद से आप भी विभिन्न प्राकृतिक समस्याओं को, आर्थिक अवसरों में बदलकर, आश्चर्यजनक प्रॉफिट प्राप्त कर सकतें है !

यानी हमारे रिसर्चर्स से प्राप्त जानकारी से, आप खूब कमाई कर सकतें है, अपनी बेहद छोटी या बड़ी, खाली – बेकार पड़ी हुई बंजर जमीन को निन्मलिखित तरीकों से बदलकर-

  • बेहद उपजाऊ खेत/बगीचे में बदलकर
  • जंगल/फ़ूड पार्क/गार्डन युक्त पार्टी/फंक्शन/सेलिब्रेशन डेस्टिनेशन आदि में बदलकर
  • भूमिगत पानी की कमी या खारापन को बदलकर
  • कार्बन क्रेडिट में बदलकर

रासायनिक खादों व कीटनाशकों के वर्षों तक इस्तेमाल करने की वजह से या खारे पानी की वजह से या किसी भी अन्य कारण की वजह से कोई भी खेत/बगीचा/जमीन, चाहे कितना भी ज्यादा बंजर हो चुका हो, तब भी उसे कुछ ही माह में निश्चित उपजाऊ बनाया जा सकता है, कुछ विशेष प्राकृतिक उपायों को आजमाकर (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को बेहतरीन प्राकृतिक तरीकों से जल्दी उपजाऊ बनाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) ! 

वास्तव में ये ट्रेंड हर शहर में देखने को मिल रहा है कि लोग अपने जीवन के यादगार पलों (जैसे- शादी, जन्मदिन, उत्सव, रेस्टोरेंट में सामूहिक भोजन, छुटियाँ मनाना आदि) के लिए ऐसी जगह जाना पसंद करतें हैं जहाँ बहुत बढियाँ प्राकृतिक नजारा – हरियाली हो, इसलिए आजकल ऐसे छोटे – बड़े थीम फ़ूड पार्क/जंगल आदि की हाई डिमांड हो गयी है जहाँ काफी पेड़ – पौधे हों ! बेहद छोटी और बंजर जमीन पर भी हमारे रिसर्चर्स की मदद से ऐसे सस्टेनेबल जंगल बनाये जा सकतें हैं जिन्हे कभी कभी खाद या पानी देने की जरूर नहीं पड़ सकती है ! (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को जंगल/फ़ूड पार्क की तरह विकसित करना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !

अगर जमीन में भूमिगत जल बहुत कम हो चुका हो या पानी खारा हो चुका हो तब भी खेती करना बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है ! तो ऐसे मौके पर काम आते हैं कुछ बेहद सरल प्राकृतिक उपाय जिनसे धीरे – धीरे भूमिगत जल की कमी और खारापन दोनों दूर होने लगते हैं (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में कम होते भूजल या खारे पानी की समस्या को दूर करके खेती से प्रॉफिट कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !

इसके अलावा कार्बन क्रेडिट से भी पैसा कमाया जा सकता है जिसमें कई कम्पनीज आपकी जमीन में लगे हर एक पेड़ के रखरखाव के बदले में आपको सालाना भत्ते दे सकतीं हैं ! मतलब जमीन और पेड़ के मालिक हमेशा आप ही रहेंगे, लेकिन उस पेड़ की ठीक से देखभाल करने के लिए, प्रदूषण फैलाने वाली कम्पनीज आपको सालाना पैसा दें सकतीं हैं, एक लिखित कॉन्ट्रैक्ट साइन हो जाने के बाद (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में पेड़ों को उगाकर कार्बन क्रेडिट से पैसा कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !

कृपया ध्यान दें हमारे शोधकर्ता कभी भी यह सलाह नहीं देते हैं कि किस जमीन/खेत/बगीचे में कौन सी फसल, पेड़ – पौधों या बीज लगाने चाहिए क्योकि पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के फसलों/पौधों की उगने की खासियत होती है इसलिए किस क्षेत्र में कौन सी फसल/पौधा उगाना ज्यादा लाभदायक होगा, उसकी एकदम सटीक जानकारी सिर्फ उस क्षेत्र में रहने वाले किसान या कृषि विभाग दे सकता है !

हमारे शोधकर्ताओं के अनुसार, वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ाना, क्योकि अगर जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बहुत कम हो जाए तो अच्छे से अच्छा बीज/पौधा लगाने पर भी या महँगी से महँगी रासायनिक खाद/कीटनाशक डालने पर भी फसल/पौधे मरने लगते हैं, वहीँ अगर जमीन की उपजाऊ क्षमता बहुत अच्छी हो तो विदेशी पौधे या किसी भी नस्ल के पौधे आसानी से उगते हुए देखे गएँ हैं !

इसलिए सभी बुध्दिमान किसानो को सबसे पहले और सबसे ज्यादा ध्यान जमीन की उपजाऊ क्षमता सुधारने पर देना चाहिए ! इसे इस आसान उदाहरण से भी समझा जा सकता है की जमीन/खेत, माँ की तरह होतें है और पेड़/पौधे/फसल उसके ऐसे दुधमुहें बच्चे की तरह होतें हैं जो अपनी धरती माँ से ही पोषण पाकर जिन्दा रहते हैं, इसलिए अगर धरती माँ की देखभाल करना छोड़कर सिर्फ बच्चे (यानी पेड़/पौधे/फसल) की देखभाल की जाए, तो ये निश्चित है कि बच्चे देर – सवेर मर जाएंगे जबकि वहीँ अगर बच्चों की देखभाल करना छोड़कर, सिर्फ धरती माँ की देखभाल की जाए तो बच्चे इतने ज्यादा स्वस्थ – मजबूत हो जाएंगे कि उन्हें ना ही कभी किसी कीटनाशक की जरूरत पड़ेगी और ना ही किसी उर्वरक की (जैसे जंगल में किसी भी पेड़ – पौधे को कभी उर्वरक या कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती है) !

आईये अब सबसे पहले आपको बंजर जमीन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के बारें में संक्षेंप में बतातें हैं-

वास्तव में जब भी, कोई दूरदर्शी व्यक्ति खेती/बागवानी के बारें में बात करतें है तो सबसे पहला प्रश्न यही आता है कि कैसे हर तरह के खेतो/बगीचों की मिट्टी को इतना ज्यादा उपजाऊ बनाया जा सके कि हर तरह के पौधों/फूलों/फलों/फसलों की पैदावार खूब हो सके, वो भी बिना किसी केमिकल युक्त फ़र्टिलाइज़र व पेस्टिसाइड (रासायनिक खाद व कीटनाशक) का इस्तेमाल किये हुए !

सामान्यतया बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए ये 2 महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं सम्पन्न करनी होती हैं- (1) जहरीले फ़र्टिलाइज़र व पेस्टिसाइड के लगातार इस्तेमाल करने से खेतों/बगीचों की जमीनों के अंदर मर चुके गुड बैक्टीरिया (अच्छे जीवाणु) को फिर से तेजी से पैदा करना होता है, ताकि जमीन की उर्वरक क्षमता व सभी तरह के पौधों की इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी हो सके (अगर जमीन स्वस्थ हो तो जमीन से आने वाले अधिकाँश हानिकारक कीटाणु अपने आप समाप्त हो जाते हैं) …… (2)- जमीन को आवश्यक कई बेशकीमती पोषक तत्व भी प्रदान करने होतें हैं ताकि सभी तरह के पौधे/फल/फूल/फसल की खूब पैदावार हो सके !

अतः आपको खेतो/बगीचों से लगातार बढ़िया फसल नहीं मिल सकती है, अगर आपके पास निम्नलिखित 4 चीजें नहीं हैं तो-

(1) फसलों के लिए खाना बनाने में माहिर, अच्छे जीवाणु !

(2) फसलों के लिए खाना बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां (जिसे ह्यूमस कहतें हैं) !

(3) जीवाणुओं को सुरक्षित रूप से रह सकने लायक खेत या बगीचा (हानिकारक केमिकल्स रहित) !

(4) अच्छे जीवाणुओं के परम् मित्र यानी विविध जीव {जैसे- चिड़िया (जो हवा से आने वाले कई हानिकारक कीड़ों को खाकर फसलों की मुफ्त में रक्षा तो करती हैं), केचुआ, तितलियाँ, भौरें और विभिन्न तरह के पेड़ आदि (लोग पेड़ों की असली महिमा समझते नहीं हैं लेकिन वास्तविकता यही है कि पेड़ों के बिना खेत परमानेंट उपजाऊ नहीं रह सकतें है क्योकि बायोडायवर्सिटी यानी जैव विविधता बिना पेड़ों के सम्भव नहीं हैं) !

अतः ये सत्य है कि अगर सबसे कम खर्च में, सबसे ज्यादा फसल, सबसे ज्यादा वर्षों तक चाहिए तो ऊपर लिखी हुई 4 चीजें आपके पास होनी ही चाहिए ……… और ये 4 चीजें कैसे आप अपने छोटे ये बड़े बगीचे/खेत/जमीन में पा सकते हैं ……… जानने के लिए कृपया हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क करिये, इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !

आईये अब बात करते हैं , भूमिगत पानी की कमी व खारापन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के बारें में-

ये तो अब लगभग सभी को पता चल गया है कि ना केवल विश्व के बल्कि भारत के भी कई दर्जन महानगरों में जमीन के नीचे का पानी एकदम सूख चुका है (ZERO Level of Ground Water) इसलिए इन शहरों के अधिकाँश लोग पूरी तरह से म्युनिसिपैलिटी (महानगर पालिका) की वाटर सप्लाई के भरोसे जीवित हैं और अगर एक दिन भी पानी की सप्लाई बंद हो जाए तो जनता में चीख – पुकार मच जाती है इसलिए म्युनिसिपैलिटी से मिलने वाले पानी में भले ही कभी गलती से कोई गंदगी मिल जाए तब भी जनता मजबूर है उसी पानी को इस्तेमाल करने के लिए !

जिन्दा रहने के लिए सबसे आवश्यक चीजों में हवा के बाद दूसरा नंबर पानी का ही आता है और यह गजब की अज्ञानता हम मानवों में देखने को मिल रही है कि हर शहर में तेजी से गिरते हुए पानी के लेवल की बार – बार चेतावनी के बावजूद भी हम लोग कुछ भी नहीं कर रहें हैं इसे रोकने के लिए ! अतः संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव से लेकर विश्व के कई बुद्धिजीवियों द्वारा की गयी यह भविष्यवाणी कि “अगला विश्व युद्ध पानी के लिए हो सकता है”, गलत नहीं लगती है !

आपको जानकार शायद आश्चर्य हो लेकिन जिन महानगरों में पानी का लेवल एकदम सूख चुका है उन महानगरों से कई लोग अपना जमा जमाया बिजनेस, नौकरी, घर, प्रॉपर्टी आदि छोड़कर दूसरे शहर जाने को मजबूर हो रहें हैं ! और जिन शहरों में पानी पूरी तरह से सूखा नहीं है लेकिन बहुत कम बचा है उनके बारे में सुनने को मिल रहा है कि वहां का पानी इतना दूषित हो चुका है कि उसे पीने से कई तरह की बीमारियां हो सकतीं हैं !

आज जिसे देखो वही अपना घर – बंगला – ऑफिस आदि सजाने में लगा हुआ है लेकिन बहुत ही कम लोग यह दूरदर्शी सोच इस्तेमाल कर पा रहें है कि आखिर क्या फायदा ऐसी सजावट का जिसे हो सकता है कि मात्र 5 से 10 साल बाद ही छोड़कर जाना पड़े क्योकि “बिन पानी सब सून” ! निकट भविष्य में, दुनिया में पानी की कमी की असली भयानक तस्वीर दिखाने की वजह से ही कुछ विदेशी मूवीज (जैसे- “द साइलेंट सी”; The Silent Sea) बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हुई है !

इसलिए हम लोग अपनी हर निजी समस्याओं को भी सरकार के मत्थे मढ़कर, शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में छिपाकर आने वाले भयानक खतरे के प्रति निश्चिन्त होकर बिल्कुल नहीं बैठ सकतें हैं ! इसमें कोई शक नहीं की भारतवर्ष के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ईमानदारी पूर्वक यथासम्भव देश हित के प्रयास में दिन रात लगे हुए हैं, लेकिन जब बार – बार समझाने के बावजदू भी करोड़ो जनता पानी की बर्बादी रोज कर रही हो तो कोई भी प्रशासन पानी की कमी को दूर करने में कितना सफल हो पायेगा !

इसलिए इससे पहले कि आपको भी पानी की कमी की वजह से अपना बना – बनाया सपनो का आशियाना यानी घर – नौकरी – बिजनेस – प्रॉपर्टी छोड़कर कही दूसरी जगह शिफ्ट होने के लिए मजबूर होना पड़े, आप निश्चित तौर पर प्रयास कर सकतें हैं निकट भविष्य में आने वाले इस दर्दनाक खतरे से निपटने के लिए ! जिसके लिए आप अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित 3 कामों में से कोई भी काम कर सकतें हैं-

(1) अपने घर की छत से जोड़कर “बोरवेल सहित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम”” या “बोरवेल रहित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” को फिट करवाना !

(2) घनी आबादी वाले क्षेत्रों यानी कॉलोनी/मोहल्लो के अंदर स्थित अपनी खुद की जमीनों में (या सरकार की बेकार – गंदी अवस्था में पड़ी हुई जमीनों में, सरकार की इच्छा व अनुमति से) छोटे – छोटे जलाशयों (यानी तालाब, Ponds) का निर्माण करवाना !

(3) कम आबादी वाले क्षेत्रों यानी कस्बों/गावों के अंदर स्थित अपनी खुद की जमीनों/खेतों में (या ग्राम समाज/पंचायत/सरकार की बेकार – बंजर अवस्था में पड़ी हुई जमीनों में, सरकार की इच्छा व अनुमति से) बड़े – बड़े जलाशयों का निर्माण करवाना !

रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रक्रिया को समझने की आसानी के लिए कह सकतें हैं, “धरती के अंदर स्थित जल को रिचार्ज (recharge) करना”, जैसे- मोबाइल को लगातार इस्तेमाल करने से जब उसकी बैटरी की बिजली कम हो जाती है तब उसे बाहर से बिजली देकर रोज रिचार्ज करना होता है, उसी तरह धरती के पानी को लगातार इस्तेमाल करते रहने से, पानी में आयी कमी को दूर करने के लिए, बाहर से पानी यानी बारिश के पानी को धरती के अंदर भेजकर, पानी की रिचार्ज करना जरूरी होता है !

वास्तव में बारिश का जो पानी हर साल बरसता है उसका अधिकांश हिस्सा जमीन के अंदर नहीं जा पाता है क्योकि बढ़ते शहरीकरण की वजह से अधिकांश जमीनों पर सीमेंट से बने हुए मकान व सड़कें बन गयी हैं (जो पानी को जमीन के अंदर जाने से रोकतें हैं) इसलिए बारिश का अधिकांश पानी, सड़क किनारे बनी हुई नालियों से बहते हुए बड़े नालों में पहुँच जाता है (और उसमे से कुछ हिस्सा सूरज की गर्मी से भांप बनकर भी उड़ जाता है), फिर बड़े नालों से अंततः नदी में पहुँच जाता है ! इस तरह शहर की बड़ी आबादी के नीचे की जमीन तक बारिश का बेशकीमती पानी बहुत मामूली मात्रा में ही पहुँच पाता है जिसकी वजह से आजकल यही विडंबना हर शहर में देखने को मिल रही है कि जमीन के अंदर पानी लगातार सूखते रहने की वजह से पानी का लेवल तेजी से नीचे गिरते जा रहा है इसलिए हर कुछ साल बाद बोरवेल को और ज्यादा गहरा खुदवाना पड़ता है !

इसलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” (Rainwater Harvesting with Borewell Recharge; वर्षा जल संचयन) वो प्रक्रिया होती है, जिसमें हर साल बारिश के मौसम में जो लाखो लीटर पानी घर की छत पर मुफ्त में बरसता है उसे भूमिगत जल तक (यानी 50 फ़ीट से लेकर 200 फ़ीट गहराई तक) तुंरत पंहुचा दिया जाता है जिससे भूमिगत जल का स्तर इतना अधिक बढ़ जाता है कि पूरे साल भर पानी का लेवल कम नहीं होने पाता है !

आज भले ही हमे पीने का पानी आसानी से मिल जा रहा हो लेकिन यह तय है कि जमीन के अंदर का पानी अगर इसी तेज रफ्तार से सूखता रहा तो बिना जलाशय की मदद के हम कुछ सालों बाद पानी नहीं पा सकेंगे ! जैसे आग लगने पर कुंआ तुरंत नहीं खोदा जा सकता है, बल्कि पहले से खोद कर रखना पड़ता है, ठीक इसी तरह निकट भविष्य में हर कॉलोनी/मोहल्ले में पानी के लिए मचने वाली जनता की चीख – पुकार को रोकने के लिए बहुत जरूरी है कि हर घर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (बोरवेल सहित या रहित) का इंस्टालेशन करवाया जाए और हर कॉलोनी/मोहल्ले/कस्बे/गाँव में थोड़ी – थोड़ी दूरी पर छोटे – बड़े जलाशयों का निर्माण करवाया जाए !

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ ऐसे सज्जनो से भी जल बचाने की अपार महिमा के बारे में जाना, जिन सज्जनों ने अपने बिजनेस में अक्सर होने वाले बड़े आर्थिक घाटों व अपने शरीर की कुछ जिद्दी बिमारियों का कारण जानने के लिए “पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी” (पूर्व जन्म चिकित्सा) की तो उन्हें पता चला की पूर्व के किसी जन्म में उन्होंने अपने ऐशो – आराम – सुख – सुविधा के लिए पानी की बहुत फिजूल खर्ची की था इस वजह से उन्हें उस पाप का दंड, इस जन्म में आर्थिक नुकसान व शरीर की बिमारी के रूप में मिल रहा है (यह घटना यह भी साबित करती है कि अगर जल का नुकसान करने से भगवान नाराज होकर दंड दे सकतें हैं तो जल को बचाने से भगवान की परम दुर्लभ प्रसन्नता भी प्राप्त की जा सकती है) !

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जल, चन्द्रमा का कारक होता है और चन्द्रमा, मन का कारक होता है इसलिए ज्योतिष के अनुसार पानी की बर्बादी करने से मानसिक अशांति बढ़ती है और मानसिक अशांति कितना बुरा असर डाल सकती है शरीरिक स्वास्थ्य पर, यह समझाने की जरूरत नहीं है क्योकि सभी डॉक्टर्स कहतें हैं “स्ट्रेस इस द रीज़न ऑफ ऑल डिसीसिस” (मतलब मानसिक अशांति ही सभी बीमारियों की जड़ है) ! लगभग सभी धर्म ग्रंथों में लिखा है कि जलाशय का निर्माण करवाना अपने पूरे परिवार के साथ – साथ सभी पितरों/पूर्वजों को भी अक्षय पुण्य व सौभाग्य देने वाला होता है क्यकि “जल ही जीवन है” !

अगर आपको अब भी “रेन वाटर हार्वेस्टिंग” या “जलाशय” के निर्माण का तरीका समझने में कोई दिक्कत महसूस हो रही हो तो, आप हमारे रिसर्चर्स की मदद से घर बैठे ही आसान उपाय जान सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Book Consultation Now) !

हमसे तुरंत जानिये कि कैसे आप खूब प्रॉफिट पा सकतें है, अपनी बेहद छोटी या बड़ी, खाली – बेकार पड़ी हुई बंजर जमीन से, इसी लिंक पर क्लिक करके